कितनी बार टूट सकता है दिल प्यार में
पहली बार था जग सब रूठा
मानो अपना साया छूटा
आकर जैसे कहे तन्हाई
क्यों तुमने थी प्रीत लगाई
फिर कुछ बात अजब थी लेकिन
पहली रात गजब थी लेकिन
दूसरी बार नहीं मन रोया
बस यु लगा कोई अपना खोया
तीसरी चौथी पाचवी छटवी
दिल के टुकड़े बिखर रहे थे
बिखरे टुकड़े छिटक रहे थे
इनके बीच था जीवन चलता
हर पल स्वाभाभिक सा ढलता
कृते अंकेश
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